आदिकालीन अर्थव्यवस्था की परिभाषा तथा आर्थिक विकास के प्रमुख स्तरों की विवेचना कीजिए आदिकालीन अर्थव्यवस्था प्रत्यक्ष रूप से आदिम लोगों की जीविका पालन या जीवन धारण से संबंधित है । जीवन धारण के लिए आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन करना, उनका वितरण तथा उपभोग करना है उनकी आर्थिक क्रियाओं का आधार और लक्ष्य होता है । और यह क्रियाएं एक आदिम समाज के संपूर्ण पर्यावरण, विशेषकर भौगोलिक पर्यावरण के द्वारा बहुत प्रभावित होती है । इसलिए जीवन धारण या जीवित रहने के साधनों को जुटाने के लिए हातिम लोगों को कठोर परिश्रम करना पड़ता है । आर्थिक जीवन अत्यधिक संघर्षमय तथा कठिन होने के कारण आर्थिक क्षेत्र में अन्य क्षेत्रों की भांति प्रगति की गति बहुत ही धीमी है । संक्षेप में आदिकालीन अर्थव्यवस्था एक ओर प्रकृति की शक्तियों और प्राकृतिक साधनों, फल मूल, पशु पक्षी, पहाड़ और घाटी, नदियों और जंगलों आदि पर निर्भर है और दूसरी ओर परिवार से घनिष्ठ रूप से संयुक्त है । आदिकालीन मानव प्रकृति द्वारा प्रदत्त सामग्री से अपने उपकरणों का निर्माण करता है और उनकी सहायता से परिवार के सब लोग उदर पूर्ति के लिए कठोर परिश्रम करते हैं । इस पर...